आज संसद में भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक ऐतिहासिक बहस देखने को मिली। केंद्र सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन को लेकर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट किया, जबकि विपक्ष ने कई बिंदुओं पर चिंता जताई। यह बहस सिर्फ शिक्षा प्रणाली में बदलाव की बात नहीं कर रही, बल्कि यह भारत के भविष्य को आकार देने वाले कदमों की दिशा तय कर रही है।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य है – समावेशी, लचीली और कौशल-आधारित शिक्षा प्रणाली बनाना, जो न केवल अकादमिक ज्ञान दे, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन के हर क्षेत्र में सक्षम बनाए। खासतौर पर स्कूली शिक्षा में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं जैसे कि 5+3+3+4 संरचना, मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, और व्यावसायिक प्रशिक्षण को मुख्यधारा में लाना।
संसद में आज की बहस में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि NEP का उद्देश्य सिर्फ "रटने वाली पढ़ाई" को खत्म करना नहीं है, बल्कि सोचने, विश्लेषण करने और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना है। इसके अलावा, डिजिटल शिक्षा, शिक्षकों का प्रशिक्षण, और उच्च शिक्षा संस्थानों में रिसर्च को बढ़ावा देना भी प्राथमिकता में है।
वहीं विपक्ष ने चिंता जताई कि ग्रामीण इलाकों में संसाधनों की कमी इस नीति को निष्प्रभावी बना सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि मातृभाषा में शिक्षा अच्छी पहल है, लेकिन शिक्षकों की उपलब्धता और सामग्री का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है।
इस बहस से स्पष्ट है कि नई शिक्षा नीति पर आम सहमति बनाना जरूरी है, क्योंकि यह नीति आने वाली पीढ़ियों की सोच और सामर्थ्य को आकार देगी। शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह एक ऐसा साधन बननी चाहिए जो राष्ट्र निर्माण की नींव रखे।